कुछ बूंदे

तस्वीर तेरी रात भर तकती रही, दो बोझल आँखें । कुछ पिघले ख्वाब, जो आंसूं बनकर बहते रहे ।।   आसमान में बेख़ौफ़ उड़ने की अजब ज़िद थी उन्हें । कुछ परिंदे, जो तल्ख़ हवाओं के नश्तर सहते रहे ।।   वो बूंदे थीं, जो खो गयी इश्क के समंदर में कहीं । कुछ मुसाफिर,... Continue Reading →

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