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  • अच्छा, तो अब चलते हैं।

    अच्छा, तो अब चलते हैं।

    Verse 1सुबह का सूरज देखके सोचो, मन कितना हर्षित होता है।फिर दिन कैसे ऊपर चढ़ता है, और शाम ढले तक तपता है।फिर डूबता दूर शितिज में जाकर और रात का मेला लगता है।पर सूरज उगता हर पल हर क्षण, दूर किसी अंधियारे में।पाना खोना खेल है देखो, रात हो या उजियारे में।रात के पहलू में…