ज़माने को बिल्कुल गवारा नहीं।

जो आशिक़ मोहब्बत में हारा नहीं।

किताबों को पढ़ के क्यों आंखे ये नम है।

ये इस फसाने का ग़म है, तुम्हारा नहीं।

साहिल खड़ें लिए सैलाब कितने।

की दरिया ने जिनको पुकारा नहीं।

इन बेलों से कहना, शाख टूटेगी एक दिन।

उम्र भर तो मिलेगा सहारा नहीं। 

आरज़ू जुस्तजू उम्र भर साथ अपने।

ये वो लहरें की जिनका किनारा नहीं। 

नाम ले ले के जो दिल जलाते रहे ।

उनके हाथों में अपना गुज़ारा नहीं ।

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